महोत्सव में छात्राओं ने रानी चेन्नाभैरा देवी के अदम्य साहस, विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष, धर्म के प्रति अपनी निष्ठा तथा मातृभूमि के प्रति उनके अपूर्व समर्पण को नाट्य, संवाद, दृश्य प्रस्तुतियों एवं भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से जीवंत कर दिया। प्रस्तुति ने दर्शकों को इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय से जोड़ दिया, जहाँ नारी शक्ति नेतृत्व और पराक्रम का प्रतीक बनी।
इस सांस्कृतिक आयोजन के साथ-साथ योग को भी विशेष रूप से शामिल किया गया, जिससे कार्यक्रम को आध्यात्मिक और स्वास्थ्यपरक आयाम प्राप्त हुआ। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सामूहिक योग प्रदर्शन ने शारीरिक अनुशासन, मानसिक संतुलन एवं भारतीय जीवन मूल्यों की महत्ता को प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया।
संस्कारशाला महोत्सव का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित न रहकर छात्राओं में संस्कार, आत्मबल, देशभक्ति, अनुशासन एवं भारतीय परंपरा के प्रति गहरी आस्था विकसित करना रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा के साथ संस्कार और स्वास्थ्य का समन्वय ही सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण करता है।
समापन अवसर पर विद्यालय परिवार ने यह संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से छात्राओं को इतिहास, संस्कृति, योग और जीवन मूल्यों से जोड़ते हुए राष्ट्रनिर्माण की दिशा में प्रेरित किया जाता रहेगा।
युग दृष्टा आचार्य भगवंत गुरुवर विद्यासागर जी की अद्वितीय साधना एवं विश्व पर उनकी सीमातीत करुणा की अभिव्यक्ति हैं, “प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ“।
जहाँ संस्कार एवं संस्कृति के गवाक्ष से कन्या रूपी बीज के उत्थान की अनगिनत संभावनाओं को समयोचित खाद पानी देकर उन्हें वटवृक्ष का रूप देने का अदभुततम प्रयोग किया जाता हैं।
प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ
दयोदय पशु संरक्षण केन्द्र (गौशाला)
ग्राम- मसोरा खुर्द, ज़िला- ललितपुर (उ. प्र.) 284403